भारत में बहु विवाह पर क्या कहता है कानून

भारत में एक से ज्यादा शादी करना यानी बहु-विवाह गैरकानूनी है। हालांकि, मुस्लिम इसके अपवाद हैं। भारत में मुस्लिम एक से ज्यादा शादी कर सकते हैं क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक ये जायज है। वह 4 शादियां तक कर सकते हैं। हालांकि, यह अधिकार सिर्फ पुरुषों को है, महिला को नहीं। यानी मुस्लिम महिला एक साथ एक से ज्यादा पुरुषों से शादी नहीं कर सकती। गोवा में तो हिंदुओं का भी दो शादियां करना वैध माना जाता है। मिजोरम में 'लालपा कोहरन थार' नाम की क्रिश्चियन जाति में भी एक से ज्यादा शादी को वैध माना जाता है। अगर इन अपवादों को छोड़ दें तो भारत में किसी हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन समेत सभी गैर-मुस्लिमों में पहली पत्नी या पति के जिंदा रहते दूसरी शादी करना गैरकानूनी है साथ ही साथ भारतीय कानून के अनुसार अपराध के श्रेणी में आता है। यदि पहली पत्नी या पति से तलाक हो जाता है तो दूसरी शादी जायज व कानूनन वैध है।  भारत में हिंदू मैरेज एक्ट का मसौदा 1955 में तैयार हुआ था और उसे 1956 से लागू कर दिया गया तब से भारत में बहुविवाह गैरकानूनी एवम अवैध है। इसके बाद भी समाज में एक से ज्यादा शादियों के उदाहरण यदा कदा मिल जाएंगे लेकिन कानूनन दूसरी शादी अमान्य होने की वजह से दूसरी पत्नी को पर्याप्त कानूनी सुरक्षा नहीं मिल सकती है। दूसरी पत्नी और उसके बच्चे संपत्ति से लेकर तमाम कानूनी अधिकारों से वंचित हो जाते है। 
हिंदू  मैरेज एक्ट 1955 के धारा 17 के अनुसार  यदि कोई व्यक्ति पहली पत्नी या पति के जिंदा रहते दूसरी शादी रचा लेता है तो यह गैरकानूनी है तथा अपराध के श्रेणी में आता है और उसे सजा भी हो सकती है। यह कानून हिंदुओं के अलावा बौद्ध, जैन और सिखों पर भी भारत में लागू होता है।
इसी तरह क्रिश्चियन डाइवोर्स ऐक्ट 1896 के धारा 60 के अनुसार , विवाह के रजिस्ट्रेशन के लिए पति-पत्नी दोनों को यह शपथ पत्र देना होता है कि उनकी पहले से कोई पत्नी या पति नहीं है अथवा जीवित नहीं है। यानी इस कानून के तहत एक से ज्यादा शादी गैरकानूनी है।
मुस्लिम वुमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डाइवोर्स) ऐक्ट 1986 के तहत एक से ज्यादा शादी जायज है। मुस्लिम पुरुष 4 शादियां तक कर सकता है बशर्ते कि वह अपनी सभी पत्नियों को समान रूप से सम्मान के साथ रख सके।
पारसी मैरेज एंड डायवोर्स एक्ट 1936 की धारा 5 के तहत भी एक से ज्यादा शादी गैरकानूनी और आपराधिक है।
इसी तरह स्पेशल मैरेज एक्ट 1954 की धारा 44 के तहत अगर कोई व्यक्ति पहली शादी के वैध पत्नी के रहते दूसरी शादी करता है तो वह गैरकानूनी है। यह आईपीसी के तहत भी अपराध है।
 भारत में मुस्लिम पुरुषों के अलावा किसी को भी एक से ज्यादा शादी करने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि कभी-कभी एक से ज्यादा शादी करने के लिए लोग धर्मपरिवर्तन का सहारा लेते है। कुछ लोग सिर्फ इसलिए इस्लाम कबूल कर लेते हैं कि इससे उनकी दूसरी शादी वैध रहेगी एवम दूसरी पत्नी वैध मानी जायेगी। सिने जगत के अभिनेता धर्मेंद्र ने भी दूसरा विवाह करने के लिए इस्लाम धर्म कबूल किया था। उन्होंने  अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना हेमा मालिनी के साथ शादी करना चाहते थे। इसके लिए दोनों ने इस्लाम धर्म को अपना लिया और फिर शादी की।  हाल में हरियाणा के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री रहे भजन लाल के बेटे और पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन भी दूसरी शादी करने के इस्लाम धर्म अपनाकर दूसरी शादी रचाई थी एवम  चन्द्र मोहन से  चांद मोहम्मद बने थे। हालांकि, बाद में वह फिर धर्मपरिवर्तन कर चंद्रमोहन बन गए। महज एक से ज्यादा पत्नी  के लिए धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने को मुस्लिम धर्मगुरु भी गलत मानते है लेकिन अब भी ऐसा देखने को सैकड़ों उदाहरण मिल जायेंगे। हाल ही में चर्चे में आए यू-ट्यूबर अरमान मलिक के मामले को देखें तो यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने दूसरी शादी के लिए धर्म बदलकर मुस्लिम बने और इस्लाम काबुल किया हैं या नहीं। अगर ऐसा नहीं है तो उनकी दूसरी शादी कानून की नजरों में अवैध और शून्य है। समाज भले ही उन्हें पति-पत्नी माने लेकिन दूसरी पत्नी को संपत्ति, तलाक, भरण पोषण जैसे कानूनी अधिकार नहीं मिल सकते। उससे पैदा होने वाले बच्चे को भी भारतीय कानून में कम ही सुरक्षा मिलेगी।
अभी दो दिन पहले समाचार के सुर्खियों में महाराष्ट्र में जुड़वा बहनों के साथ शादी करने वाले अतुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 494 के तहत केस दर्ज हुआ है। इस धारा के तहत अगर कोई व्यक्ति पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करता है तो वह शादी अवैध और शून्यकरणीय है। इसके तहत दोषी को 7 वर्षो तक की कैद के साथ जुर्माने की सजा भी हो सकती है। हालांकि, यह धारा कहती है कि अगर किसी की पत्नी या पति 7 साल से ज्यादा वक्त से लापता रहा हो और जिसका कोई कही खबर नही है कि वह जीवित है या नहीं और उसके जिंदा होने के बारे में कोई खबर न आ रही हो तो वह व्यक्ति दूसरी शादी कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति इस बात को छिपाकर कि वह पहले से शादीशुदा है, फिर शादी करता है तो उस स्थिति में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 495 के तहत मुकदमा होलगती है। इसके तहत उसे 10 साल तक की कैद के साथ जुर्माने की सजा हो सकती है।

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